बागोर की हवेली

पिछोला झील के किनारे पर बागोर कि हवेली का निर्माण अठारहवीं शताब्दी में मेवाड़ घराने के प्रधानमंत्री ठाकुर अमरचन्द बड़वा द्वारा करवाया गया। इस हवेली में 138 कक्ष, बरामदे, गलियारे, झरोखे आदि बने हुए है। एक समय में मेवाड़ कुलीन परिवार के निवास में प्रयुक्त यह हवेली पशिचम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र को 1986 में हस्तांतरित करने से पूर्व लगभग आधी शताब्दी तक जीर्णर्शीर्ण अवस्था में रही, जिसका वैभव विलुप्त हो गया था।

सांस्कृतिक केन्द्र ने आरम्भ से ही इस हवेली को एक संग्रहालय के रूप में विकसित करने का मानस बनाया। इसमें पशिचम राज्य राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले संग्रहालय का अपना अनपम वास्तु शिल्प है तथा इसका अपना ऐतिहासिक महत्व है, यह हवेली अपने आप में एक संग्रहालय है तथा गोवा व महाराष्ट्र की संस्कृति इसके परिवेश के प्रतिकूल प्रतीत हुई। 1992 में इस हवेली को 18वीं व 19वीं शताब्दी में मेवाड़ के राजसी वैभव एवं संस्कृति को प्रतीक रूप में संरक्षित करने के उद्देश्य से हवेली पुनरूद्धार का निर्णय लिया गया।

 

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Bagore Ki Haveli, Gangaur Ghat

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