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पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर के सदस्य राज्य अपनी पारम्परिक सांस्कृतिक धरोहर के कारण जाने जाते है। इनमें अमूल्य कला शैलीयां जिनमें शास्त्रीय एवं लोक कला दोनों ही पाई जाती है का प्रलेखन अति आवश्यक है। अत: इन्हे विभिन्न चरणा में प्रलेखित किया जा रहा है। प्रथम चरणों में उन कला शैलियों का प्रलेखन किया जा रहा है।
प्रलेखन का उद्देश्य यह है कि इस कला शैलियों को भावी पीढी के लिए संजोकर रखा जाए ताकी वह जान सके कि इन प्रकार की कला शैलियां हमारे यहां रही है साथ ही अगर संभव होतो उन्हे विकसित भी किया जा सके। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र निम्न प्रकार से प्रलेखन कर रहा है- |