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राष्ट्रीय
सांस्कृतिक आदान-प्रदान योजना (एन.सी.इ.पी). |
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राष्ट्रीय
सांस्कृतिक आदान-प्रदान योजना (एन.सी.इ.पी) |
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राष्ट्रीय
सांस्कृतिक आदान-प्रदान योजना से
तात्पर्य कलाकार, शिल्पकार,
चित्रकार, मूर्तिकारों का अन्य
राज्यों में गमन-आगमन द्वारा
विभिन्न शोधार्थियों, अकादमियों,
लेखकों, संगीतज्ञों व लोक कला के
क्षेत्र में विशेषज्ञों व नवोदित
कला साधकों के मध्य कला सेतु
स्थापित करना है। जिसमें सेमीनार,
प्रदर्शनी व कार्यशालाएं सम्मिलित
हैं। |
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इस योजना के
उद्देश्य- |
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भारत सरकार
द्वारा देश के एक क्षेत्र की
सांस्कृतिक विविधता और विलक्षणता
को देश के अन्य क्षेत्रों तक सुगमता
से पहुंचाने के उद्देश्य से यह
योजना प्रारम्भ की गई है। इस योजना
में देश की सांस्कृतिक अखण्डता को
प्रबल, विभिन्न परंपराओं,
मान्यताओं व पहनावा धारण करने व
संस्कृति को मानने वाले लोगों में
एकता बनाये रखने तथा एक दूसरे को
सराहने व समझने की भावना को बढ़ावा
देने के लिए के ध्येय से इस योजना
में कला दलों व चाक्षुष कला/साहित्य
दलों व विशेषज्ञों को अन्य राज्यों
व क्षेत्रों में आदान प्रदान किया
जाता है।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय एकात्मता
एवं सांप्रदायिक सौहार्द के लिए एक
महत्वपूर्ण यंत्र की तरह कार्य
करता है। पश्चिम क्षेत्र
सांस्कृतिक केन्द्र अपनी जरूरतों
के अनुसार शिल्पग्राम उत्सव, लोक
उत्सव, उमंग, पारंपरिक उत्सव जैसे
वृहद समारोहों में कलाकार,
शिल्पकार, नाट्य दलों, चित्रकारों
इत्यादि को आमंत्रित करता है वहीं
केन्द्र अन्य क्षेत्रीय
सांस्कृतिक केन्द्रों को उनकी
आवश्यकता के अनुरूप कलाकार व
शिल्पकार प्रायोजित करता है।
प्रायोजक केन्द्र द्वारा इन
कलाकारों का पारिश्रमिक एवं
यात्रा व्यय वहन किया जाता है जबकि
मेजबान केन्द्र द्वारा स्थानीय
सुविधाएं मुहय्या करवाई जाती हैं।
राष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान
योजना के लिए कलाकारों/शिल्पकारों
को देय भत्तों का निर्धारण भारत
सरकार द्वारा समय-समय पर किया जाता
है। |
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